पुस्तक भले खो जाए पर पसंदीदा बुकमार्क न खोए
पुस्तक भले खो जाए पर पसंदीदा बुकमार्क न खोए क्योंकि बुकमार्क का खो जाना बेचैन कर देता…
काशी आना, वहाँ से लौटना, उसे समझ पाना — जितना सहज लगता है, उतना है नहीं। इधर सोशल मिडिया पर एक पोस्ट दिखी कि काशी की मिटटी भी काशी से बाहर नहीं ले …
Read moreबीते सप्ताह में दूसरी बार विश्व पुस्तक मेले पहुँच गया। असल में घर पर बैठा था, और आजकल जब आदमी के पास कोई ठोस काम न हो तो वह या रील स्क्रोल करता है य…
Read more"रूदादे सफर" पंकज सुबिर द्वारा लिखा गया उपन्यास...जब इस उपन्यास का नाम देखा तो गूगल बाबा से पूछा कि इसका मतलब क्या है , कई अर्थ थे लेकिन उ…
Read moreपुस्तक समीक्षा – भूख लेखक – अमृत लाल नागर मुख्य पात्र – पांचू गोपाल अक्सर मेरे परिवार वालों की मुझसे यह शिकायत रहती है कि खाने में नमक , मिर्च …
Read moreभाग चार – घर सबसे कठिन काम होता है परिवार जन की अनुमति लेना, पर ये हमारे अपने खुद के हाथ में होता है, निर्भर करता है आप कैसी इमेज बना कर रख रहे है…
Read moreभाग तीन – होय वही जो राम रचि राखा पहली सोलो यात्रा थी तो अन्दर ही अन्दर घबराहट तो उमड़ उमड़ कर आ रही थी, ऊपर से साइकल से जाना वो भी कोविड काल, बिना…
Read moreभाग दस – हरिद्वार उसके बाद साइड में जंगल आने लगे, बोर्ड लगे नजर आने लगे जिन पर लिखा था गुलदार से सावधान, देखकर बड़ा रोमांचित महसूस हुआ वही एक पेड़ पड़ा…
Read moreभाग पांच - निंद्रा तो वो रात आ गई, अगली सुबह निकलना था रात आँखों में ही कट गई, नींद भी आने का नाम नहीं ले रही थी, एक या दो बजे झपकी लगी तो पहुँच गय…
Read moreदिनांक 23 अक्तूबर 2020 यात्रा पिछले भाग में आपने पढ़ा होगा कि कोविड का समय चल रहा था, लॉकडाउन लगा हुआ था ... आगे पढ़िए भाग दो – मित्र आदित्य भाई मेरे …
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