Header Ads Widget

Responsive Advertisement

Ticker

6/recent/ticker-posts

पुस्तक भले खो जाए पर पसंदीदा बुकमार्क न खोए


 पुस्तक भले खो जाए पर पसंदीदा बुकमार्क न खोए

क्योंकि बुकमार्क का खो जाना बेचैन कर देता है,  एक खालीपन छोड़ जाता है, हम उसे मिस करते हैं हमारा उससे लगाव होता है 

पुस्तक पढ़ी जाती है, शुरू होती है और पन्ने समाप्त होते हैं  फिर वह किसी अलमारी के कोने में टिक जाती है, 

लेकिन बुकमार्क…

वह अगली पुस्तक के लिए फिर से तैयार रहता है..वह याद दिलाता है कि कहानी का अंत, पढ़ने का अंत नहीं है मित्र

जीवन में पुस्तकें घटनाएँ हैं एक रिश्ता, एक नौकरी, एक संघर्ष, एक यात्रा, वे आती हैं, पूरी होती हैं, और बीत जाती हैं...

हम उन्हें यादों की शेल्फ़ में सजा देते हैं

पर बुकमार्क जीवन में वह है जो हमें आगे बढ़ाता है , एक विश्वास, 

कहानी तो जन्म लेती है, उतार-चढ़ाव से गुजरती है, पर बुकमार्क चुपचाप हर पन्ने पर हमारी जगह संभाले रखता है , वही बताता है कि हम कहाँ से चले थे और अभी कहाँ तक पहुँचे हैं

इसलिए पुस्तक के खो जाने का दुख कम है, पर कुछ चुनिंदा बुकमार्क के खोने का डर रहता है क्योंकि हमारे फेवरेट बुकमार्क के बिना आगे बढ़ने का मन नहीं करता , वो चाहे कुछ न करे पर उसका आंखों के सामने बने रहना आवश्यक है , जीवन के हर पेज पर  

धूप में बैठे बैठे यूं ही कुछ यायावर

Post a Comment

0 Comments