पुस्तक समीक्षा – भूख
लेखक – अमृत लाल नागर
मुख्य पात्र – पांचू गोपाल
अक्सर मेरे परिवार वालों की मुझसे यह शिकायत रहती है कि
खाने में नमक , मिर्च ज्यादा कम हो रोटी जली हो या संबंधित सब खा
लेता है बोलता क्यों नहीं है । वो मुझे टेस्ट के लिए नहीं देते अक्सर बढ़े
लोग कहते हैं कि
"। भूख मीठी कि , भोजन मीठा । "
पहले मैं भी कह देता था भैई भोजन मीठा लेकिन अब समझ आया कि भूखे व्यक्ति का एक ही
धर्म होता है वह है अन्न ( भोजन ) अकाल शब्द की सही परिभाषा वो दे
सकता है जिसने इसे देखा झेला और महसूस किया हो पुस्तक के पढ़ते हुए जब
जब में कोई निवाला खाता हूं , या चूल्हा, खाना पकाते लोगों को देखता हूं वही कहानी मेरे
जहान में फिर से सजीव हो उठती है ।
कहानी का मुख्य पात्र पांचू गोपाल मोहनपुर के एक स्कूल में शिक्षक है कहानी 1943 में
हुआ बंगाल के भीषण अकाल की पृष्ठभूमि पर है जहां भूख इंसान को कितना नीचे गिरा
सकती है क्या करवा सकती है इसका वर्णन है ।
लिखूं क्या समझ नहीं आ रहा डायरी में एक छोटा सा अंश पड़ा मिला । जो
इस प्रकार है
" भला राजा के घर , मोतियों का काल
अरे न होने से तो काने मामा ही भले "
पांचू अब मोहनपुर में प्रवेश कर रहा था झोपड़ियां दिखाई पड़ने लगी थी इन्हें
झोपड़ियां कहना भी पाप होगा मिट्टी की चार टूटी हुई दिवालों के ढह , जिनके बांस
बीके छप्पर बीके चिथड़े बीके और घर गृहस्थी लूटी बच्चे इंसान के बच्चे मालूम नहीं
पड़ते ये समूची बस्ती ही इंसानी बस्ती नहीं मालूम पड़ती ।
झुटपुटी सांझ धीरे धीरे ढल रही है उसके मद्धिम उजाले में ये हिलते डुलते प्राणी सामने पांच
छः जीवित नर कंकाल छीना झपटी कर रहे हैं । उनकी अस्पष्ट और भयावह आवाजों के
सामूहिक स्वर सांझ की बढ़ती हुई अंधियारी को मनहूसियत का रंग दे रहे थे
दस रोज से भूख की पीड़ा सहते हुए अब उसे आदत हो गई है अब उसे भूख
लगती नहीं उसे भूख की याद आती है । मनुष्य के जीवन में घटनाओं का चक्र
कैसे चलता है एक के बाद एक घटना इस तरह से आ जाती है जैसे पूर्व से ही
निश्चित हो सब क्या है जो कुछ भी होता है अकस्मात होता है अपने आप ।
जब अन्न दाता ही नहीं रहेगा खाने वाला क्या खाकर बचेगा सोना , चांदी ,
जवाहरात को क्या दांतों से चबाया जा सकेगा एक दिन सभी मर जाएंगे
"पेट का कभी न भरने वाला गड्ढा कैसे भर पाएगा "
समीक्षा को पूरा पढ़ने के लिए धन्यवाद । मैने यह पुस्तक 2025 में पढ़ी उस समय इसका
थोड़ा हिस्सा डायरी में लिख लिया अभी फिर से इस किताब के कुछ पेज पलट के देखे ....

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